महिलाओं में वेरिकोस वेन अधिक होने के कारण

महिलाओं में कुछ हारमोन की वजह से रक्त शिरायें की दीवारें फैल जाती हैं। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान पैरों की रक्त शिराअेा पर अधिक दबाव पडने के कारण ये शिरायें कमजोर हो जाती हैं। हालांकि ज्यादातर महिलाओं को गर्भावस्था के बाद यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती हैं । पेट में पनप रहे बच्चेदानी के टयूमर के कारण भी यह बीमारी हो सकती है । आजकल महिलाओं में फैशन एंव दिखावे की बढती होड़ के कारण भी उनमें यह समस्या बढ रही है। ऊंची एड़ी की सैंडिल एंव जूतिया तथा अत्यंत टाइट पैंट एंव जिंस पहनने के कारण यह समस्या होने की आशंका बहुत ज्यादा रहती है । टाइट पोशाक खास कर टाइट जिंस पहनने के कारण कमर एंव जांघो पर अधिक दबाव पडता है जिससे शिराओं में रक्त का बहाव रुक जाता है ।

इस बीमारी के प्रति अज्ञानता के कारण ज्यादातर लोग यहां तक कि सामान्य चिकित्सक इसे आथ्र्राइटिस, सियाटिका और रक्त धमनियों में रुकावट जैसी समस्या मान लेते हैं जिससे सही उपचार में विलंब होता है और बीमारी बढती जाती है। इसलिए मरीज को इस बीमारी का संदेह होने पर उसे सामान्य चिकित्सक या सामान्य सर्जन के बजाय किसी सुयोग्य कार्डियोवैस्कुलर या वैस्कुलर सर्जन से इलाज कराना चाहिए ताकि समय पर सही उपचार हो सके।

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