वेरिकोस वेन के उपचार

नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वेरिकोस वेन के इलाज की कारगर विधि का विकास किया गया है। प्रांरभिक अवस्था में इसका इलाज व्यायाम, जीवन शैली मे बदलाव एंव दवाइयों के सहारे किया जाता है। विशेष तरकीब से बनायी गयी क्रमित दबाव वाली जुराबें इस रोग को नियन्त्रण करने में काफी़ कारगर सिद्ध होती हैं। इन क्रमित दबाव वाली जुराबों की मरीज़ के हिसाब से सही फिटिगं व नाप अत्यन्त आवश्यक है। कभी कभी इंजेक्शन (स्क्लेरोथिरेपी) के जरिये भी इलाज़ किया जाता है। पर यह ज्यादा कारगर व स्थायी नहीं होता है।

लेकिन इस रोग के बढ जाने पर ऑपरेशन की मदद से वेरिकोस वेन को निकाल दिया जाता है। इसके लिए फ्लेबेक्टोमी, वेन स्टिपिंग और इंडोस्कोपी जैसी विधियो का इस्तेमाल किया जाता है। फ्लेबेक्टोमी के तहत पैर पर छोट . छोटे चीरे लगाकर सभी छोटे . छोटे वेरिकोस वेन निकाल लिए जाते है । वेन स्टिपिंग के तहत छोटे चीरे के जरिये लम्बे वेरिकोस वेन को निकाला जाता है ।

जब बीमारी अधिक गंभीर हो जाए और पैर में ठीक नहीं वाले जख्म बन जायें तो लेसर की मदद से सर्जरी करने की जरुरत पड सकती है। इसमें मरीज को कम तकलीफ होती है कम रक्तस्त्राव होता है और मरीज को कम दिन तक अस्तपाल में रहना पडता है । आजकल आर.एफ.ए. तकनीक एक लोकप्रिय व सबसे आधुनिक इलाज की तकनीक है। इसके लिये मरीज़ का सही चुनाव बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इस तकनीक के लिये उपयुक्त मरीज न होने पर अपेक्षित सफलता मिलने की सम्भावना कम हो जाती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Us Now
WhatsApp