टाँगों की त्वचा का रंग क्यों बदलता हैं ?

शरीर के अन्य अंगों की तरह टाँगों को भी आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। यह आक्सीजन धमनियों (यानी आरटरी) में प्रवाहित शुद्ध खून के जरिये पहँुचायी जाती है। टाँगों को आक्सीजन देने के बाद यह आक्सीजन रहित अशुद्ध खून शिराओं (यानी वेन्स) के जरिये वापस टाँगों से ऊपर फेफड़े की तरफ शुद्धीकरण के लिये ले जाया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि यह शिरायें टाँगांें का ड्रेनेज सिस्टम निर्माण करती है। शिरायों यानी वेन्स की कार्यप्रणाली अगर किसी कारण से शिथिल हो जाती है तो टाँग व पैर का ड्रेनेज सिस्टम चरमरा जाता है जिसका परिणाम यह होता है कि अशुद्ध खून ऊपर चढ़ कर फेफड़े की ओर जाने की बजाय टाँगों के निचले हिस्से में इकट्ठा होना शुरू हो जाता है। फिर शुरू होता है पैरों में सूजन व टाँग के निचले हिस्से की त्वचा का रंग गहरा होना और काले निशानों का उभरना। अगर समय रहते इनका समुचित इलाज किसी वैस्क्युलर सर्जन से नहीं कराया गया तो टाँगों में उभरे काले निशान धीरे धीरे और गहरे व आकार में बढ़ते जायेगे और अन्ततः लाइलाज घावों में परिवर्तित हो जायेंगें।

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