October 2026

अगर आपकी टाँगों पर काले निशान है तो निम्नलिखित सावधानियाँ बरते:

ऊँची एड़ी के जूते व सैंडल का प्रयोग कतई न करें। जौगिंग, स्किपिंग, एरोबिक्स या ऐसा कोई उछलकूद वाला व्यायाम जिसमें पैर के घुटने पर बार बार झटके लगें, कतई न करें। बगैर झटके दिये हुये, पैर उठाने व मोड़ने वाले व्यायाम वेन्स के लिये फायदेमन्द है। ऐसे व्यवसाय या ऐसी शारिरिक मुद्रा से बचें

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इलाज की विधायें

ज्यादातर मरीजों मे दवा, नियमित रोजाना टहलना और विशेष व्यायाम की ही जरूरत होती है। पर कुछ मरीजों में आपरेशन की आवश्यकता पड़ती है। आज के युग में वेनस वाल्वुलोप्लास्टी, एक्ंजीलरी वेन ट्रान्सफर या वेनस बाईपास सर्जरी जैसी आधुनिकतम तकनीक की मदद से रोग को नियंत्रण करने में लाभ मिलता है। अगर पैर की सूजन,

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क्या करें अगर त्वचा का रंग गहरा हो गया हैं

अगर आपकी टाँग के निचले हिस्से की त्वचा का रंग गहरा व काला होने लगा हैं। तो इन काले निशानों का कारण जानना बहुत जरूरी है। इसके लिये कुछ विशेष जाँचें जैसे वेनस डाप्लर स्टडी, एम आर् वेनोग्राम व कभी कभी एंजियोग्राफी का सहारा लिया जाता है। खून की विशेष जाँच कर यह पता लगाना

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टाँगों की त्वचा का रंग गहरा हो रहा हैं तो कहाँ जायें ?

सी. वी. आई. रोग के शुरूआती लक्षणों में शाम ढ़लने तक टाँगों व पैरों में सूजन का आ जाना, और सुबह उठने के वक्त सूजन का गायब होना है। पर जैसे जैसे यह मर्ज बढ़ता जाता है, टाँगों में हल्का दर्द, खिचाव व थकान की शिकायत होने लगती है। आगे चलकर टाँगों व पैर की

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व्यायाम व नियमित न टहलना एक दूसरा महत्वपूर्ण कारण

सी. वी. आई. का दूसरा प्रमुख कारण पैदल चलने व व्यायाम का नगण्य होना है। रेाजाना पैदल न चलने से या टाँगों की कसरत न करने से टाँगों की माँसपेशियों द्वारा निर्मित पम्प जो अशुद्ध खून को ऊपर चढ़ाने में मदद करता है, कमजोर पड़ जाता है। कुछ लोगों की शिराओं में स्थित कपाट (यानी

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वेन्स में खून के कतरों का जमाव एक प्रमुख कारण

शिराओं का रोग यानी सी. वी. आई. के पनपने के कई कारण हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रमुख हैं डीप वेन थ््रााम्बोसिस यानी डी.वी.टी. इस रोग में टाँगों की वेन्स (शिराओं) में खून के कतरे जमा हो जाते हैं। यह कतरे या तो बीमारी के बाद पूरी तरह गायब नहीे हो पाते या अगर घुल भी

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टाँगों की त्वचा का रंग क्यों बदलता हैं ?

शरीर के अन्य अंगों की तरह टाँगों को भी आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। यह आक्सीजन धमनियों (यानी आरटरी) में प्रवाहित शुद्ध खून के जरिये पहँुचायी जाती है। टाँगों को आक्सीजन देने के बाद यह आक्सीजन रहित अशुद्ध खून शिराओं (यानी वेन्स) के जरिये वापस टाँगों से ऊपर फेफड़े की तरफ शुद्धीकरण के लिये ले

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कहीं आपके टाँगों की त्वचा का रंग गहरा तो नहीं हो रहा हैं ?

अगर आपके एक या दोनों पैरों की त्वचा का रंग, बाकी शरीर की त्वचा के रंग से ज्यादा गहरा है, और आपको एक घंटे से ज्यादा खड़े रहने में परेशानी होती है और चलने से पैरों में सूजन आ जाती है, थोड़ा चलने के बाद खिचाव या आवश्यकता से ज्यादा थकान महसूस होती है, तो

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टाँगों में दर्द होने पर कहाँ जायें?

अगर पैरों में दर्द के लिए रूग्ण धमनियाँ जिम्मेदार हंै तो पैरों में रक्त प्रवाह को पुनः बहाल करने के लिए कई सारी विधाओं का सहारा लेना पड़ता है जैसे धमनी पुनर्निमाण, धमनी बाईपास व एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग। अगर टाँग में दर्द का कारण श्रिाओं यानी वेन्स का रोग है तो वीनस एंजियोप्लास्टी व स्टेंटिंग या

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टाँगों में दर्द होने पर कहाँ जायें?

टाँगों में दर्द होने पर किसी जनरल सर्जन या हड्डी हड्डी विशेषज्ञ की बजाय किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लें और उनकी निगरानी में रक्त धमनियों या शिराओं की जाँच करायें। इनकी जाँचों के लिए टांगों की डापलर स्टडी, सी़ टी़.वीनोग्राम और, सी़ टी आरटीरियोग्राफी करवायें। इसलिए ऐसे किसी अस्पताल में जायें जहाँ किसी वैस्क्युलर

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