पैरों में सूजन हमेषा क्यों बनी रहती है

आजकल अपने भारतवर्श में हर चैथे या पँाचवें व्यक्ति को आए दिन टाँगों या पैरों में सूजन के बारे में षिकायत बनी रहती है। विषेशकर महिलायें पैरों की सूजन से अक्सर परेषान रहती हैं। जिन लोगों की किसी दुर्घटना में पैर की हड्डियाँ टूट गई थी और हड्डी का अॅापरेषन हुआ था, उन लोगों के पैर में हमेषा सूजन बनी ही रहती है। कुछ लोगों को चलने के बाद पैर में सूजन आ जाती है। कुछ लोगों में विषेशकर महिलाओं में दिन ढ़लते ही शाम के वक्त पैरों में सूजन आ जाती है।
अगर टाँगों व पैरों में सूजन बराबर बनी रहती हैं और सुबह व षाम में कोई ख़ास सूजन में बदलाव नहीं आता है तो इसके दो कारण होते हैं। एक तो गन्दा खून ऊपर दिल की ओर ठीक से पहुँचता नहीं हैं, जिससे टाँगों में आॅक्सीजन रहित गन्दे खून का जमाव होना षुरू हो जाता हैं। सुबह के वक्त सूजन थोड़ा हल्की मालूम पड़ती हैं और षाम तक सूजन अपनी पुरानी अवस्था में लौट आती हैं। दूसरा कारण पैर की अन्दरूनी वेन्स में रूकावट होना हैं। इस रूकावट का कारण ज्यादातर ाुरूआती दिनों मंे पर्याप्त इलाज़ के अभाव में यह खून के कतरे स्थाई रूप से टाँगों की अन्दरूनी षिराओं (डीप वेन्स) में जमा हो जाते हैं। जिससे टाँगों में एकत्र हुए गन्दे खून के लियें ऊपर चढ़ने का मार्ग अवरूद्ध हो जाता हैं। इन सब का मिला जुला प्रभाव टाँगों व पैरों में स्थाई सूजन के रूप में परिणित हो जाता है। इस अवस्था को मेडिकल भाशा में पी॰टी॰एस॰ यानी पोस्ट थ््राौम्बाॅटिक सिनड्रोम कहते हैं। इसलिए आप को चाहिये कि जब कभी टाँगों की अन्दरूनी वेन्स में खून के कतरों के जमाव का अंदेशा हो तो बगैर देर किये किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लें और उनकी निगरानी में प्रभावी इलाज़ करायें ।

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